हम हर रोज सोचते है की कुछ बदले .............कुछ नया हो .............लेकिन खुद कुछ नया करे ...........या कोइ कुछ नया करे तो हम उसे सराहे ये हम कभी नहीं सोचते | हमारा काम है हर नया काम करने वाले को तबतक उलाहना देना जबतक वो पूरी तरह से निराशा में ना घिर जाए | यदि ,, वो निकल आता है हमारी इन सब गटर वाली बातों से निकल कर तब हम कहते है ..........आदमी था काम का || और वो ,, ना निकल पाए तो .................उसके मरने का हमें कोइ दुःख नहीं रहता ..........हम फिर से नया शिकार ढूंढ लेते है || हम सभी सामाजिक प्राणी कम और वायरस जायदा है ................हम मनुष्य है ...............लेकिन मनुष्यता नहीं जानते || हमें रोज कुछ नया चाहिए ..................किसी की मदद हो गयी ,, सैलरी में बढ़ोतरी ,, किसी को खाना खिलाना ...........किसी के चहरे पे मुस्कराहट लाना ............ कोइ नई चित्रकारी बनाना...............कुछ नया करना .................कुछ नया पकाना ............कुछ नया खाना ................आसमान में लकीरे खींचना ....................जमीं में तारे उगना............. फसलों की तो बात ह...
Posts
- Get link
- X
- Other Apps
हिंदी कविता 3 अपने बुरे समय में .................सबसे बेहतर हैं,, सबसे दूरियां बढ़ा लेना क्योकि...................अक़्सर लोग आपकी नजदीकियों को ............. जरूरतों का नाम दे दिया करते है || प्रिया मिश्रा :)) **** भविष्य अभी खतरे में है और .................खतरे में रहेगा क्युकी लोग ना आज की सोचते है ना वो भविष्य की सोचते है भूतकाल में हम सभी का जीवन व्यतीत हो रहा है || प्रिया मिश्रा :))
- Get link
- X
- Other Apps
आपके किसी भी समस्या का बस एक ही समाधान है तब तक मौन रहिये ..................जब तक आप ,, उस समस्या का खुद समाधान ना ढूंढ ले मित्र ,, लोग विचार देते है ................ समाधान नहीं .....................वो हमें ही ,, ढूंढ़ना होता है || प्रिया मिश्रा :)) **** हर बात में हाँ ,, कह देने वाले लोगो से कभी उनकी मर्जी भी पूछ लिया कीजिये प्रिया मिश्रा :)) **** मैं हर रोज ,, हर पल ठगा गया हूँ मैं हर रोज ,, हर पल ठगा जाऊँगा मैं मानवता हूँ ,, मैं एक दिन मनुष्यो के हाथो मारा जाऊंगा || प्रिया मिश्रा :))
- Get link
- X
- Other Apps
जब खुद का जीवन कठिन लगने लगे तब .................दुसरो के जीवन को आसान करने के बारे में सोचना चाहिए खुद से भी प्रेम होने लगता है || प्रिया मिश्रा :)) **** जब तबाही की लहार उठ रही थी तो सब मौज में थे .................... अब कहर है तो दोष दे रहे एक दूसरे को ये पूरानी सोच नई पद्धति को जन्म कैसे देगी ?? प्रिया मिश्रा :)) ****