रात की काली कढ़ाई
रात की काली कढ़ाई में
सफ़ेद सा चुना लगा के
एक नजर बट्टू बनाया है
अब ,, उसे लगाना है
चाँद के खेत में
जहां मैंने सितारों की
खेती की ,, हाँ सितारों की खेती
ये सितारे चमकते नहीं है
ये तो बस मेरे आँखों से
निकले वो मोती है
जिन्हे मैंने अपने आँचल में
पोंछ के ,, झाड़ दिया था ||
प्रिया मिश्रा :))
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